गुमनाम है कोई
गुमनाम है कोई
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गुमनाम है कोई,
अनजान है कोई,
पहचान उसकी ना जाने कोई,
जो खास था उसमे बस जाने वही.
सोचता था जो वह पा न सका,
पा लिया उसने जो, उसके लायक नहीं ,
खोजता रहा वह मंज़िल अपनी ,
खो गया चंद रास्तों में ,यूं ही,
डर है मुझे, कहीं वह पूरी तरह,
खो ना जाये , कहीं जिसे मैं जानता ,
भटकते रास्ते पे जिसका दम घुट रहा ,
समझाता हूं उसे, वह जिंदा है अभी,
यह सोचते हुए,खो ना जाये कहीं.
© रोहित गुप्ता
