अभिव्यक्ति

अभिव्यक्ति

गर्त में डूबा हुआ हूं

ख्वाब में खोया हुआ हूं
उस कैनवास को देखो
उस पर मैं उतारा गया हूं


कहीं उसकी उस कलम में
 स्वप्न उसके अश्रुओं में
हर शब्द उसकी ज़ुबां पर
मैं बतलाया गया हूं


हर गली, हर रास्ते पर
हर खुशी, हर मुकाम पर
व्यक्त करता हूं वो चेहरा
जो एक नजर देखा गया हूं


कभी कहीं उस वक्त को देख
तुम चीत्कारते नहीं थे
आज मुझे उस नजर देख
नयन अश्रु भर लिया गया हूं


कल्पना हूं कल्पना मैं
जिसे तुम व्यक्त करना चाहते हो
व्यक्त करने का माध्यम शायद
मैं तुमसे पाया न गया हूं


© रोहित गुप्ता