दुनिया तमाशबीनों का शहर है


दुनिया तमाशबीनों का शहर है



दुनिया तमाशबीनों का शहर है
ये मुफ़लिसी में डगमगाने कि डगर है

कोई जज़बात छिपाता है , कोई अंदाज बदलता है
कोई लिहाफ बदलता है, तो कोई अलफ़ाज़ छिपाता है,
सुनी को अनसुनी करके यूं बरबाद करते हैं
चशमदीद होकर भी नज़रअंदाज़ करते हैं
ये इन कफिरों का घर है
दुनिया तमाशबीनों का शहर है

कोई मंदिर में जाता है, कोई मजहब बदलता है
कोई मतलब समझता है, तो कोई मतलब बदलता है
अकसर महफ़िलों में ये इल्म का जिक्र करते है
दिखाने भर को महज जुल्म की फिक्र करते हैं
ये कम्बख्त इन्हीं काफिरों का घर है
दुनिया तमाशबीनों का शहर है

कोई हद करता है, कोई हरकत करता है
कोई तरकस बदलता है, तो कोई वार करता है
क्यों देते हो बयान ऐसे, जो भीड़ का खौफ़ है तुमको
उठती सदा से डरते हो फिर क्यों मखौल करते हो
ये राजनीती का जहर है
दुनिया तमाशबीनों का शहर है

कोई इश्क करता है ,कोई अक्स बदलता है
कोई मह्बूब बदलता है, तो कोई इकरार करता है
तबस्सुम नहीं समझा और इश्क करते हो
तरन्नुम नहीं जाना और गजल करते हो
ये महज इश्कबाजों का कहर है
दुनिया तमाशबीनों का शहर है
                                                                              © रोहित गुप्ता